मेरे अतरंगी यार

हर कुछ महीनों में
तुम से मिलने आ जाता हूँ
तुम से मिल कर ख़ुद को
थोड़ा और ज़्यादा मिलता हूँ
तुम से बातें करूँ
तो लगता है मानो
ख़ुद से गुफ़्तगू चल रही है
तुम से मिल कर सारे ग़म
सारे दुख
बहुत छोटे लगते हैं
अपनी यारी है ही
कुछ अतरंगी सी
कुछ हम सेंगी सी
तुम यूँ ही रहना
मेरे दोस्त कम हैं
मैं जल्द ही आऊँगा
तुम से मिलने
दिल की बातें करने
तब तक
अपना ख़याल रखना
मेरे अतरंगी यार मेरे पहाड़

— Saurabh Yadav Kaalikhh

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