@Kaalikhh
Saurabh Yadav Kaalikhh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saurabh Yadav Kaalikhh's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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ज़ख़्मी से दिन हैं आजकल 'कालिख़' यहाँ
तुम याद जाने इस क़दर क्यूँ आ रहे
थे बहुत शाही से उसके शौक़ मैं क्या बोलता
जान को पिस्ता खिलाने में यहाँ पिसता रहा
टूट जाता इम्तिहानों से न होकर मुतमइन
हूँ बुलंदी पे जो मुर्शिद हौसला मिलता रहा
मुझे था लगा सब सही चल रहा
सही चल रहा था मगर कट गया
मेरा था कभी कट चुका इसलिए
न फिर से कटेगा मगर कट गया
दिल-ओ-जान की ख़ूब बाज़ी लगाई
बढ़ाते रहे हारकर ज़िंदगी भर
ख़ुदा और कितना रहूँ मैं परेशाँ
क़यामत रही हमसफ़र ज़िंदगी भर
ज़िंदगी में मोड़ कालिख़ आगे ऐसे आएँगे
याद बातें आएँगी बिन ध्यान जो सुनता रहा
तीरगी थी रास्तों में और भटका मैं बहुत
रौशनी पाई गुरू से जब कभी गिरता रहा
सस्ती मुस्कानें सच्ची हैं
महॅंगी वाली तो झूठी हैं
सोना चाँदी पैसा वैसा
क्यूँ जेब सभी को भरनी हैं
भला क्या करेगा अगर कट गया
उड़ा था परिंदा कि पर कट गया
कई साल वो छाँव देता रहा
कड़ी धूप में फिर शजर कट गया
न तारीख़ बदली न ही हाल बदला
न बदली अदाएँ न ये साल बदला
मेरा शहर बदला मेरा गाँव बदला
न ही लोग बदले न सुरताल बदला
आक़िबत तक आदमी में सिर्फ़ पत्थर रह गया
देख कर हैरान हूँ ये लाश डूबी क्यूँ नहीं
मेरी ज़िंदगी में ख़ुशी का ठिकाना नहीं है
यहाँ मैं किसी का नहीं कोई मेरा नहीं है
रूह सारी सर-ख़ुशी से छोड़ती सारे बदन
सोगवारी बेवजह सारी यहां घर घर चले
रूह सारी सर-ख़ुशी से छोड़ती सारे बदन
सोगवारी बेवजह सारी यहां घर घर चले