तमाम शब जो दिल में था नहीं हुआ
वो मेरा हो के भी मिरा नहीं हुआ
मगर मिरी वफ़ा के फूल खिल गए
बिछड़ के मुझ से ग़ैर का नहीं हुआ
जुदा हुआ है जिस्म ही फ़क़त मिरा
वो मेरी रूह से जुदा नहीं हुआ
मैं जाम-ए-इश्क़ पी चुका था इस लिए
शराब का मुझे नशा नहीं हुआ
नहीं था जो गुमान में को हो गया
जो होना था वही हुआ नहीं हुआ
हमें पता था छोड़ देगा इस लिए
हमारे साथ हादसा नहीं हुआ
— Khalid Lakhnavi















