दवाएँ काम करती हैं

दुआएँ काम करती हैं

ख़मोशी टूटती है जब
सदाएँ काम करती हैं

जो हो अफ़वाह फैलाना
हवाएँ काम करती हैं

छुपाना दाग़ हो गर तो
क़बाएँ काम करती हैं

परेशानी के आलम में
अदाएँ काम करती हैं

मुहब्बत की फ़ज़ाओं में
वफ़ाएँ काम करती हैं

अगर धरती हो प्यासी तो
घटाएँ काम करती हैं

जो हो बच्चे को चुप करना
बलाएँ काम करती हैं

हुसूल-ए-क़ामयाबी में
भुजाएँ काम करती हैं

— Kumar Aryan

More by Kumar Aryan

Other ghazal from the same pen

See all from Kumar Aryan →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling