दर्द कुछ यूँँ बढ़ गया है
आँखों से दरिया बहा है
आ गए किस मोड़ पर अब
सिल लबों को अब लिया है
फिर मगर क़िस्सा सुनो अब
रोज माँगी इक दुआ है
मिल गया राही हमें जब
फिर नहीं रहता ख़फ़ा है
बातें करता है बहुत ही
चुप नहीं क्यूँ हो रहा है
गाँव है सुंदर बड़ा फिर
शहरस रहता जुदा है
हम लिखेंगे आज क़िस्सा
दोस्ती को रब लिखा है
प्यार से रहना सिखाया
प्यार ही सब कुछ लिखा है
हम समंदर में नहीं हैं
हमने उसको भी पढ़ा है
आँखों से आँसू बहे हैं
दर्द का मतलब दवा है
रात गहरी हो रही है
वो ग़ज़ल इक लिख सका है
घर के परदे गिर गए हैं
याद दिल ने फिर किया है
यार चादर है मुड़ी जो
कौन दिल को भा गया है
वो हमें फिर क्यूँ रुलाता
दूर जब उसने किया है
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