माँ शारदे
हर्फ़ मुझ को दिए आपने शारदे
मान रक्खा सदा आपने शारदे
तम मिटाया मेरा शारदे आपने
ज्ञान मुझ को दिया आपने शारदे
जैसे पतवार बिन नाँव ख़ाली रही
शारदे आप के बिन नहीं कुछ मेरा
आपने ही सँभाला मुझे हर घड़ी
धैर्य की छाँव मिलती रही शारदे
हर्फ़ मुझ को दिए आपने शारदे
मान रक्खा सदा आपने शारदे
शब्द में भाव भरती हैं माँ शारदे
शब्द को अर्थ भी दे दिए शारदे
आपने स्वर दिए कंठ प्यारा लगा
गीत भी आपने दे दिए शारदे
हर्फ़ मुझ को दिए आपने शारदे
मान रक्खा सदा आपने शारदे
ले के कंपित सा मन डर के रहने लगा
शून्य था मन मेरा मैं भटकता हुआ
आप के वर ने मुझ को सँवारा यहाँ
रौशनी से मेरे मन को रौशन किया
हर्फ़ मुझ को दिए आपने शारदे
मान रक्खा सदा आपने शारदे
मुझ को सुर भी दिया अर मधुर भी किया
भाव भी भर दिया मुझ को पूरा किया
आपने मेरी ग़ज़लों में जीवन भरा
और दुनिया में क़ाबिल ग़ज़ल-गो किया
हर्फ़ मुझ को दिए आपने शारदे
मान रक्खा सदा आपने शारदे














