क्या और चाहिए मेरी जान के सिवा
सब कुछ पड़ा हुआ गिरवी जान के सिवा
दिल है मेरा किसी का पहले ही और तुम
क्या माँस का करोगी भी जान के सिवा
दिल से निकल गई हो तुम और फिर तो क्या
अपनी भी जान निकलेगी जान के सिवा
मैं क्यूँ उतावला हूँ इक मौत के लिए
बस एक ही तो है साथी जान के सिवा
— Rohit Kumar Madhu Vaibhav















