
कि जिस की बातों से सब को लुभा रहा है तू
ये किस के हिज्र का क़िस्सा सुना रहा है तू
न जाने क्यूँ किसी की एक भी नहीं सुनता
'मनीष' ख़ुद को ख़ुदा क्यूँ बना रहा है तू
— Manish Nauhwar
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