जब वो लड़की रह रहकर रोती है
बस टुकड़ों में बारिश तब होती है
जुगनू उसकी रखवाली करते हैं
जब भी वो लड़की छत पर सोती है
सोना चाँद हीरा तो नहीं है पर
दुनिया रौशन कर दे वो मोती है
इतनी नाज़ुक है वो लड़की जैसे
कोई प्यारी सी तितली होती है
इतना मनोज ख़ुद का कब होता है
जितना वो लड़की मेरी होती है
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