जाने कैसी दुनिया है जाने कैसा मंज़र है जिस को ढूँढा दुनिया में वो मेरे ही अंदर हैज़हर भरा है लोगों में, चालें चलते फिरते हैंऊपर एक मदारी है नीचे सारे बंदर है— Mayank gourh