chala hai phir ishq ke safar par | चला है फिर इश्क़ के सफ़र पर

  - MIR SHAHRYAAR
चलाहैफिरइश्क़केसफ़रपर
रुकादिनभीदिलअपनेघरपर
नज़रभीहलकानहोतीहोगी
बोझबनकररहोनज़रपर
मैंअपनेख़्वाबोंकाइकमुसाफ़िर
कभीठहराकिसीकेदरपर
येदिलकाक़िस्साहैदिलकीबातें
रखदलीलेंकिसीनज़रपर
बसएकलम्हाथाऔरतुमथे
तमामदुनियाथीइकनज़रपर
बुझाबुझासाहीशाम-ए-ग़मने
रखाहैदिलजानेकिससहरपर
तेरेक़दमपरसमयरुकाथा
हवारुकीथीतेरीनज़रपर
सभीचराग़ोंकोफिरबुझाकर
वोनिकलाहैजानेकिससफ़रपर
  - MIR SHAHRYAAR
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