ख़ुद को बर्बाद कर के बहुत ख़ुश है तूख़ुद को बर्बाद कर के तुझे क्या मिलादिल तू बाज़ार-ए-दिल आया ही क्यूँ था बोलहुस्न के हाथों मर के तुझे क्या मिला— MIR SHAHRYAAR