अब नहीं है याद उस को नाम हमारा
करता था दिल से जो एहतिराम हमारा
चाहे हमें याद कोई रक्खे न लेकिन
ज़िन्दा रहेगा हमेशा काम हमारा
ऐसा नहीं उस की सोच हम से अलग है
फ़र्क है कुछ जीने में मुक़ाम हमारा
और भी अब मुनहसिर नहीं रहा लेकिन
चाहिए 'यासिर' हमें कलाम हमारा
— Ammar 'yasir'















