Ammar 'yasir'

Ammar 'yasir'

@Mohammad_yasir

Ammar 'yasir' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ammar 'yasir''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

वो शहर और ज़मीन-ओ-मकाँ अभी तक हैं हमारे कान में गूँजी अज़ाँ अभी तक हैं — Ammar 'yasir'
करेगा क्या ज़माना फ़रेब-ए-तर मैं रोऊँगा तो अंगार आएँगे — Ammar 'yasir'
समझ आया ये फ़लसफ़ा अब मुझे नहीं जुड़ता कुछ टूट जाने के बा'द — Ammar 'yasir'
माँ तुझ को बताता तो नहीं हूँ पर तुझ को पता है ना मेरा प्यार — Ammar 'yasir'
फ़लक तक पहुँच जाएगा तू मगर ये रख याद तू क़ब्र घर है तेरा — Ammar 'yasir'
काश तू इस से पहले मर जाता 'यासिर' उस की मेहंदी पे नाम है और किसी का — Ammar 'yasir'
अब नहीं है याद उस को नाम हमारा करता था दिल से जो एहतिराम हमारा — Ammar 'yasir'
हम ज़माने से डरते हुए लोग मज़हबों में हैं बिखरे हुए लोग — Ammar 'yasir'
क्या इस फ़साने की ज़बाँ बनोगी क्या तुम मिरे बच्चों की माँ बनोगी — Ammar 'yasir'
दूर जाने का डर सता रहा है तेरे इतने क़रीब होने से — Ammar 'yasir'
इतना प्यार में शर्मिंदा हुआ है अब तू शर्म से मर क्यूँ नहीं जाता — Ammar 'yasir'
लड़कियों का ये दीन अब का नहीं अब कोई बिगड़ा बकरा मारना है — Ammar 'yasir'
उस की आँखों में पिघल जाते हैं हर शब आवारा निकल जाते हैं — Ammar 'yasir'

Ghazal

मिलता हूँ उस से तो वो कुछ मुझ को अपना लगता है क्या पता उस का ये मुझ से कैसा रिश्ता लगता है ये नहीं मालूम साथी है या दुश्मन है मेरा हाँ मगर इस कमरे में ही मुझ को अच्छा लगता है कुछ अलग सी हरकतें करता हैं देखूँ जब उसे वो मुझे हर वक़्त इक सपने में खोया लगता है नींद आए भी तो सोता ही नहीं हूँ मैं कभी ये समझ आया बिछड़ के उस से कैसा लगता है देख कर उस को यूँँ नज़रों को झुका लेता हूँ मैं मुझ को उस को देखना भी कुछ बुरा सा लगता है वो अगर ग़ुस्सा करे तो फिर मैं हँसने लगता हूँ ग़ुस्से में भी कितना तो वो शख़्स प्यारा लगता है — Ammar 'yasir'