मुझ को पहचान मेरे लहजे से
देख मत मुझ को इस रवय्ये से
मैं ने सिगरेट थाम कर फेंकी
बच गया है ये हाथ जलने से
दूर जाने का डर सता रहा है
तेरे इतने क़रीब होने से
ऐसी स्याही से है लिखा ये नाम
अब कि मिटता नहीं मिटाने से
मुझ को आदत है तन्हा रहने की
ख़ुश हूँ मैं तेरे छोड़ जाने से
मैं भी पहले ये सोचता था कभी
कौन मरता है प्यार करने से
— Ammar 'yasir'















