यहाँ कोई मेरा सहारा नहीं
किसी को यहाँ पर मैं प्यारा नहीं
मैं ये जिस समुंदर में हूँ अब जहाँ
यहाँ अब कोई भी किनारा नहीं
वो मुझ को अकेले गया छोड़ कर
सो मैं ने भी वापस पुकारा नहीं
मैं उस से अलग तो हो जाऊँ मगर
बिना उस के मेरा गुज़ारा नहीं
चले साथ वो दूसरे के किसी
मुझे ये कभी भी गवारा नहीं
— Ammar 'yasir'















