तुम जो थे उस के वो मोहरे रहना
उस के कहने पर तुम चलते रहना
उस ने थामा औरों के हाथों को
तुम अपने हाथों को मलते रहना
सब दुनिया को पाने को चल निकले
तुम इस कमरे में ही जलते रहना
उस को पाना और मसअला है लेकिन
ये बस में है उस को तकते रहना
यासिर मेरी एक ही ख़्वाहिश है अब
बस उस की बाहों में सोते रहना
— Ammar 'yasir'















