उस की गिनती गुलाब में आती है
वो जब मिलने हिजाब में आती है
वो है जन्नत में रहनी वाली लड़की
वो कब आख़िर तुराब में आती है
उन आँखों का नशा मैं क्या बतलाऊँ
वो इक महँगी शराब में आती है
उस की तुम को मिसाल दूँ कैसे मैं
वो सब से ला-जवाब में आती है
हम 'यासिर' रात को सजा करते हैं
वो हम से मिलने ख़्वाब में आती है
— Ammar 'yasir'















