ग़लती की मेरी तुम सज़ा देना
बा'द में पर मुझे दवा देना
मेरी चाची ये काम करती हैं
दर्द की आग और जला देना
भर गए ज़ख़्म अब सभी मेरे
आना तो दर्द अब नया देना
जन्मदिन पर रुलाने के बा'द अब
मुझ को तोहफ़ा ये कोई क्या देना
उस का 'यासिर' वो लहजा ऐसा है
ग़ुस्से में भी मुझे हँसा देना
— Ammar 'yasir'















