ज़ुल्फ़ों के बादलों में छुपा मुझ को
बारिश में तेरी थोड़ा भिगा मुझ को
इतना तू दूर जा चुकी है जानाँ
ख़ुश्बू में तेरी अब तू मिला मुझ को
आँखों में तेरी तीर है वो जो एक
वो तीर सीने में तू चुभा मुझ को
मिल के मैं उस से ये न समझ पाया
आख़िर कि अब हुआ है ये क्या मुझ को
बाहों में तेरी अब मुझे खोना है
तू प्यार से गले तो लगा मुझ को
— Ammar 'yasir'















