मज़हब का एंगल लाते हैं
दोनों तबक़े गर्माते हैं
हिन्दू-मुस्लिम लड़वाते हैं
हिन्दू-मुस्लिम लड़ जाते हैं
केवल दंगे भड़काते हैं
रोटी ही इस की खाते हैं
रोज़ नया इक छोड़ शगूफ़ा
ये लोगों को उलझाते हैं
लिखते हैं इक क़िस्सा मिल के
फिर सब चैनल दोहराते हैं
बात नहीं करते मुद्दे पे
बस मुद्दे से भटकाते हैं
सच्चाई का दावा कर के
झूठी ख़बरें फैलाते हैं
— Mohit Subran















