बीस बरस के बा'द भी मुझ
में थोड़ा घर बाक़ी है अब भी
एक सफ़र तो ख़त्म हुआ पर एक सफ़र बाक़ी है अब भी
बस एक उस को कह देने भर से सपने सच हो जाते हैं
जादूगर के हाथों में इतना तो हुनर बाक़ी है अब भी
वो रात को दिन भी कह दे तो सब ताली पीटने लगते हैं
या'नी पंछी के दिल में सय्याद का डर बाक़ी है अब भी
दिल से याद मिटा डाली हैं फोन से उस की सब फोटो भी
ज़ेहन में इकसठ बारह वाला वो नंबर बाक़ी है अब भी
उस को टूटा देख के यारो इतना ख़ुश भी मत होना तुम
रस्सी बेशक राख हुई हो पर तेवर बाक़ी है अब भी
— Mukesh Guniwal "MAhir"















