ग़ुस्से से आवाज़ मिरी ऊँची हो जबलब पर मेरे अपने लब रख देना तुमजाने का मैं कह भी दूँ जो तुम से तोमुझ को अपनी बाहों में भर लेना तुम— Navneet Vatsal Sahil