ज़माने से नाराज़ हारे खड़े हैं
कहीं दूर दरिया किनारे खड़े हैं
इसी रास्ते से गुज़रना है उस को
सभी पेड़ ज़ुल्फ़ें सँवारे खड़े हैं
मिली साथ में एक फ़ोटो हमारी
यूँ लगता है चंदा सितारे खड़े हैं
कभी सोचते हैं बड़ा घर बनाएँ
कभी लगता है पेड़ प्यारे खड़े हैं
ये तालाब अपनी नमी खो चुका है
फ़क़त अब किनारे किनारे खड़े हैं
— Neeraj Nainkwal















