न समझो लड़ाई वो हारा हुआ है
उसे हारने का इशारा हुआ है
उसे चाँद तारों की सुहबत मिली थी
वो आवारगी में हमारा हुआ है
मरूँगा बचूँगा नहीं जानता हूँ
मगर वार दिल पे करारा हुआ है
सिकुड़ने लगा है मेरा आसमाँ अब
नज़र से परे कब नज़ारा हुआ है
वो आतिश-फ़िशाँ था मगर अब ये हालत
कि बुझते बुझाते शरारा हुआ है
नदी की मुहब्बत में आँसू बहाकर
समुंदर भी मीठे से खारा हुआ है
वो दीपक भला क्यूँ डरेगा हवा से
जो ख़ुद आँधियों का सँवारा हुआ है
— Nilesh Shevgaonkar















