ज्यों मिली दोनों की अँखियाँ प्यार की
जुड़ गई हैं सारी कड़ियाँ प्यार की
एक दिन फिर लौटने के वास्ते
छोड़ आया हूँ मैं गलियाँ प्यार की
मैं तुम्हारा हूँ हमेशा जिस तरह
प्रेम-सागर और नदियाँ प्यार की
आ भी जाओ अब कहीं ये ही न हो
बीत जाएँ यूँ ही रतियाँ प्यार की
ख़ल्वतों से हो रही हैं आजकल
चिट्ठियाँ लिख-लिख के बतियाँ प्यार की
हुस्न की ख़ुशबू ही ख़ुशबू चार-सू
खिल रही हो तुम या कलियाँ प्यार की
लाख बेहतर हैं बरा-ए-ज़िंदगी
दिल-कुशी से रंग-रलियाँ प्यार की
देवताओं को भी मुझ से रश्क है
ख़्वाब में आती हैं परियाँ प्यार की
ग़म मिले जो भी वो दुनिया ने दिए
सिर्फ़ तुम ने दी हैं ख़ुशियाँ प्यार की
एक-दूजे की मुतम्मिम हैं 'मिलन'
ज़िंदगी और चंद-घड़ियाँ प्यार की














