सहराओं से उत्कट रवानी की तरफ़

  - Milan Gautam
सहराओंसेउत्कटरवानीकीतरफ़
मैंचलदियाहूँआजपानीकीतरफ़
हाथोंसेबजरीसाफिसलताजारहा
हैबढ़रहाबचपनजवानीकीतरफ़
येउम्रहीतोहैमोहब्बतकरनेकी
मैंजारहाहूँइकदिवानीकीतरफ़
दौलतकीजिस-जिसकोभीताक़तमिलगई
वोबढ़रहाहैहुक्मरानीकीतरफ़
हमइम्तिहाँभीलेचुकेहैंउसकाऔर
अबबढ़नाहोगाजावेदानीकीतरफ़
अबमुल्कमेंग़ुर्बतभीछानेवालीहै
हैहीनहींकोईकिसानीकीतरफ़
इंसानियतकामरनातोज़ाहिरहीहै
सबजारहेहैंबद-गुमानीकीतरफ़
जोसुनकेदिलमहसूसकरपाएचलो
इकऐसीहीअफ़ज़लकहानीकीतरफ़
  - Milan Gautam
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

More by Milan Gautam

As you were reading Shayari by Milan Gautam

Similar Writers

our suggestion based on Milan Gautam

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari