यक़ीनन तुम किसी से दिल लगाने जाओगी जानाँ
पर अपने दिल के अंदर तुम मुझे ही पाओगी जानाँ
झगड़ना ख़ूब लड़ना ख़ूब पर वा'दा करो मुझ से
वफ़ा-दारी तुम अपने साथ में ही लाओगी जानाँ
चलो अंजान-पन में ही सही दिल तो लगाया था
मुझे यूँ छोड़कर तन्हा बहुत पछताओगी जानाँ
तुम्हारा दूर जाना भी मुझे मशहूर कर देगा
मगर मैं चाहता हूँ तुम बिरह ठुकराओगी जानाँ
मुझे भी देखना है मुझ से ज़्यादा कौन पागल है
तुम अपने आशिक़-ए-नौ से मुझे मिलवाओगी जानाँ
'मिलन' के बा'द उस सा दूसरा मिलना नहीं मुमकिन
मैं लिख कर देता हूँ तुम खोजती रह जाओगी जानाँ
— Milan Gautam















