वो जो शबों में रौशनी था क्या हुआजो शख़्स तेरी ज़िंदगी था क्या हुआइक राह-रौ ने राह बदली ख़ैरियतअच्छा भला जो अजनबी था क्या हुआ— Prashant Prakhar