रहेगा मौत का डर ज़िंदगी के ख़त्म होने तक
ख़ुदा को भूलना मत बंदगी के ख़त्म होने तक
तसव्वुर इश्क़ का क़ाएम रहे सो शर्म मत छोड़ो
मुहब्बत मत करो शर्मिंदगी के ख़त्म होने तक
अँधेरा ये हमें कैसे डराएगा ख़ुदा जब है
रहेगी रौशनी ताबिंदगी के ख़त्म होने तक
किसी को क्या पता इस ज़िंदगी की साँस है कितनी
चलेगी साँस ये पाइंदगी के ख़त्म होने तक
कभी भी 'आब' को इस जिस्म से फ़ुर्सत नहीं मिलती
रहेंगी बेड़ियाँ पाबंदगी के ख़त्म होने तक
— Piyush Mishra 'Aab'















