ख़ुश्क आँखों की नमी हूँ
शोर करती ख़ामुशी हूँ
ग़लतियाँ होती हैं मुझ से
यार मैं भी आदमी हूँ
ध्यान से पढ़िए मुझे सब
थोड़ी मुश्किल शा'इरी हूँ
मैं सभी के काम आता
रास्ते की रौशनी हूँ
जो भरोसा तोड़ते हैं
उन की ख़ातिर दुश्मनी हूँ
कष्ट में सब याद करते
जैसे कोई ख़ुद-कुशी हूँ
क्या पता कब बीत जाऊँ
आज कल की ज़िंदगी हूँ
— Avijit Aman















