Avijit Aman

Avijit Aman

@Poetavijitaman

Avijit Aman shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Avijit Aman's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

बड़ी शिद्दत से दिल तोड़ा है तुम ने सिला अच्छा दिया है आशिक़ी का — Avijit Aman
ध्यान से पढ़िए मुझे सब थोड़ी मुश्किल शा'इरी हूँ — Avijit Aman
यार जिस पे बीतती है बस वही दुख जानता है — Avijit Aman
मुहब्बत दोस्तों की ऐसी है मुझ सेे ज़रूरत पड़ने पर वो फोन करते हैं — Avijit Aman
सिर्फ़ तुम को ही माना है अपना सिर्फ़ तुम को ही तरजीह दी है — Avijit Aman
चूम कर हाथ मेरे कहा उस ने ये क्या लिखी है ग़ज़ब शा'इरी आपने — Avijit Aman
बात लग जाती है दिल पे कोई 'अमन' हम फ़क़त यूँँ ही ग़ुस्सा नहीं होते हैं — Avijit Aman
हमेशा तोड़ देती हो न जाने क्यूँँ हमें क्या खेल का सामान समझा है — Avijit Aman
याद कब से तुम्हारी मुझे आ रही आके मुझ को गले से लगा लो न तुम — Avijit Aman
इतनी आसाँ नहीं ज़िंदगी है 'अमन' पाँव के छाले हम को बताते हैं ये — Avijit Aman

Ghazal

डाँटती है बस मुझी को सुन ज़रा इस ख़ामुशी को बोलते हैं मुस्कुराओ छीन कर मेरी हँसी को दे के आँसू पूछते हैं क्या हुआ मेरी ख़ुशी को तुम को आगे बढ़ना है गर मत सुनो तुम फिर सभी को चाहते हो सीखना गर आज़माना ज़िंदगी को इश्क़ तुम को हो गया गर दोष मत दो दोस्ती को खेलकर हैं तोड़ देते दिल न देना हर किसी को जान लेती है ये सबकी तुम न करना आशिक़ी को आँखों को तकलीफ़ दे जो छोड़ ऐसी रौशनी को ज़िंदगी से थक चुका हूँ रास्ता दो ख़ुद-कुशी को बेटियों को घूरे जो गर मारों ऐसे आदमी को अब नहीं आएँगे मोहन शस्त्र दो तुम द्रौपदी को धार लानी होगी इस में चाहिए दुख शा'इरी को नाम करना है जहाँ में छोड़ दूँ क्या नौकरी को — Avijit Aman
हर समय हर घड़ी नहीं मिलती होंठों पर ये हँसी नहीं मिलती हम भी शामिल हैं बदनसीबों में हम सेे भी ख़ुद-कुशी नहीं मिलती साथ क़िस्मत भी चाहिए थोड़ी पढ़ के बस नौकरी नहीं मिलती इक दफ़ा उम्र बीत जाए गर फिर दुबारा कभी नहीं मिलती दीजिए वक़्त थोड़ा ख़ुद को भी बा'द में ज़िंदगी नहीं मिलती अब कहाँ वो जुनून दिखता है अब वो दीवानगी नहीं मिलती वो मुहब्बत जो करती है बस माँ सब जगह देख ली नहीं मिलती मैं जिसे चाहता हूँ शिद्दत से यार मुझ को वही नहीं मिलती जितनी मेहनत मैं करता हूँ मुझ को उतनी भी सैलरी नहीं मिलती हक़ अमीरों का ही है क्या इस पे क्यूँँ मुझे ये ख़ुशी नहीं मिलती राज को मिल गई थी तब सिमरन देव को अंजली नहीं मिलती इक मुहब्बत ने छोड़ा है मुझ को वरना ये शा'इरी नहीं मिलती — Avijit Aman
होंठों से मेरे हर इक हँसी छीन ली ज़िंदगी की मिरी हर ख़ुशी छीन ली ज़िम्मेदारी का जब भार हम पे पड़ा ज़िम्मेदारी ने ये ज़िंदगी छीन ली जिस पे था सब सेे ज़्यादा भरोसा हमें उस ने उम्मीद भी आख़िरी छीन ली हम अगर चाहते लौट भी सकते थे इस अना ने मगर वापसी छीन ली दोस्त भी अब नहीं मानती वो मुझे इस मुहब्बत ने इक दोस्ती छीन ली शा'इरी भी नहीं हो रही हम से अब ग़ुस्से ने हम से ये नौकरी छीन ली ज़िंदगी छोड़ना चाहता था मगर माँ की तस्वीर ने ख़ुद-कुशी छीन ली जीने की अब वजह कोई भी तो नहीं जितनी थी वो सभी की सभी छीन ली रौशनी करने की आदतों ने 'अमन' ज़िंदगी से मिरी रौशनी छीन ली — Avijit Aman
दीप जलते हुए हम बुझाते नहीं मुस्कुराते हुए को रुलाते नहीं हम को मालूम है दिल ये नादान है इस लिए दिल किसी का दुखाते नहीं है मुहब्बत उन्हें भी पता है हमें इश्क़ कितना है पर वो बताते नहीं ध्यान रखते हैं वो हर मिरी बात का प्यार करते तो हैं पर जताते नहीं जानें क्यूँँ लोग रिश्ते बनाते हैं फिर जब उन्हें वो कभी भी निभाते नहीं दौड़कर आते थे जो फ़क़त फ़ोन पर अब बुलाने पे भी यार आते नहीं बात जो करते हैं साफ़ ही करते हैं बात को हम कभी भी घुमाते नहीं दोस्त माना है गर मुझ को तुम ने कभी दोस्त से बात फिर कुछ छुपाते नहीं सब को हम सेे फ़क़त इक शिकायत यही जाने क्यूँँ यार तुम मुस्कुराते नहीं बात दिल की किसी से नहीं कहते हैं घाव दिल के सभी को दिखाते नहीं शान से चलते हैं सर उठा के 'अमन' हर किसी दर पे सर हम झुकाते नहीं — Avijit Aman