सभी थे, बस वहाँ तू ही नहीं था, सोभरी महफ़िल को ख़ाली बज़्म पढ़ आयागया तो था नमाज़ ए ईद पढ़ने "प्रीत"मगर तुझ पे लिखी इक नज़्म पढ़ आया— Prit