हमारा तो पता उस आँख में है बस
हमें दिखती वफ़ा उस आँख में है बस
ज़माने का नहीं है तो नहीं होगा
हमारा तो ख़ुदा उस आँख में है बस
समुन्दर में अगर डूबे तो क्या डूबे
हमें तो डूबना उस आँख में है बस
उसी इक आँख के कायल हुए हैं हम
अजब सा इक नशा उस आँख में है बस
— Kaviraj " Madhukar"















