कि मुश्किल से कटी हर इक घड़ी हैबड़ी ज़ालिम ख़ुदाया फ़रवरी हैअभी हम ने सुना है ये किसी सेकि उस को बस हमीं से दिल-लगी है— Kaviraj " Madhukar"