हाँ तुमको देखें निगाह भर के जरा सा मेरे क़रीब आओ
हटा के घूँघट को अपने सिर से जरा सा मेरे क़रीब आओ
हो आसमानी गगन कभी भी तो मेघ बनकर के उस पे छाना
तुम्हें मैं छू लूँ किरण से अपने जरा सा मेरे क़रीब आओ
अगर जो होती ख़ता हमारी मैं उस सेे पहले ही सिर झुकाता
मेरी क़सम फ़ैसला बदल के जरा सा मेरे क़रीब आओ
तमाम तन्हा व काली रातों को मैंने काटा है करवटों में
सुकूँ मिलेगा हमें तुम्हीं से जरा सा मेरे क़रीब आओ
सभी ने अफ़वाह है ये फैलाई शहर में आने वाली फिर हो
अधिक नहीं बस जरा सा मेरे जरा सा मेरे क़रीब आओ
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