akelaa ham nahin hai saath men toofaan hai aaKHir ab | अकेले हम नहीं है, साथ में तूफ़ान है आख़िर अब

  - Raunak Karn

अकेले हम नहीं है, साथ में तूफ़ान है आख़िर अब
यही जो लोग है फिर साथ में शैतान है आख़िर अब

हमें अब वक़्त ही तो है नहीं, जो याद से आए हम
भले उसके लिए हम यार, इक अंजान है आख़िर अब

उसे बस देखते ही यार हम तो मर गए यूँँ ही तब
अरे! चल हम नहीं अच्छे ज़िया हैवान है आख़िर अब

मिलेंगे हाँ मिलेंगे फिर कभी हम भी वही पे यारा
जहाँ से तू रही मिलकर यही फ़रमान हैं आख़िर अब

नहीं है इन दिलों में अब जगह तो बैठने की यारा
मगर बाहर भले छोटी मगर दालान है आख़िर अब

हमारी ज़िंदगी में वो न हो, चल ठीक है 'रौनक' हाँ
हमारे शक्ल पे तो यार ये मुस्कान है आख़िर अब

  - Raunak Karn

Bhai Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Raunak Karn

As you were reading Shayari by Raunak Karn

Similar Writers

our suggestion based on Raunak Karn

Similar Moods

As you were reading Bhai Shayari Shayari