यूँँही न गुलिस्तान बयाबान हुआ हैलगता है यहाँ से कोई तूफ़ान गया हैफिर आपने माँगी है ख़ुशी मेरी ख़ुदा सेफिर आपने कितना मेरा नुक़्सान किया है— Ritika reet