खिल न पाए वो कली किस काम की

बिन मोहब्बत ज़िंदगी किस काम की

आत्माओं का मिलन हो जाए तो
पंडितों की कुंडली किस काम की

हम को तो मालूम था वो आएगा
सुर्ख़ आँखों में नमी किस काम की

दिल न टूटा हो तुम्हारा जब तलक
जौन की फिर शा'इरी किस काम की

दर्द लोगों को न लिख पाया अगर
हाथ में फिर लेखनी किस काम की

माँ से करना प्यार तू भी सीख ले
धोखा करती छोकरी किस काम की

हम तो करना चाहते थे शा'इरी
कर रहे हैं नौकरी किस काम की

शे'र कहना जानते हो तुम 'सचिन'
खुल के बोलो ख़ामुशी किस काम की

— Sachin Sharma

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