Sachin Sharma

Sachin Sharma

@Sachinsharmaa

Sachin Sharmaa shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sachin Sharmaa's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम को देकर पकौड़ी बेसन की ख़ुद वो पिज़्ज़ा उड़ा रही होगी — Sachin Sharma
मुझे ढूँढती हैं तुम्हारी ये आँखें मैं जो ढूँढ़ता हूँ वो तुम में नहीं है — Sachin Sharma
ख़ज़ाना चाहते हो और मुश्किल भी नहीं कोई ख़ज़ाना का कोई नक़्शा कभी आसाँ नहीं होता — Sachin Sharma
मक्कारी नहीं है ये अदाकारी है मेरी अनपढ़ हूँ मगर नौकरी सरकारी है मेरी — Sachin Sharma
रोज़ बदलता है स्टोरी अपनी वो हर तस्वीर हिफ़ाज़त से रक्खी है — Sachin Sharma
वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता — Sachin Sharma
बेटा कहा गया है बुढ़ापे की लाठी तो थपकी दिला के माँ को सुलाती है बेटियाँ — Sachin Sharma
कहनी अगर ग़ज़ल है उस्ताद कीजिए कुछ शे'र कह रहा हूँ इरशाद कीजिए — Sachin Sharma
आज बारिश के मौसम ने क्या कर दिया वो जो बिछड़ा था फिर याद आने लगा — Sachin Sharma
पहले ही मिसरे में आप याद आ गए और ग़ज़ल ये धरी की धरी रह गई — Sachin Sharma
हज़ारों शे'र कहने को तो कह सकते सचिन लेकिन ग़ज़ल के शे'रों में मक़्ता कभी आसाँ नहीं होता — Sachin Sharma
किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता — Sachin Sharma
बहुत बेचैन होता हूँ तो इक तस्वीर देखूँ मैं लकीरों पर नहीं विश्वास क्या तक़दीर देखूँ मैं — Sachin Sharma
तुझे देखना है क़रीब से तू जो पास आ के यूँँ बैठ जा तिरे होंठ सुर्ख़ गुलाब हैं तो गुलाब को अभी चूम लूँ — Sachin Sharma

Ghazal

एक कमरे सी ज़िंदगी मेरी मेज़ कुर्सी से दोस्ती मेरी मोहतरम जौन याद आते हैं चीख़ती है ये ख़ामुशी मेरी जौन को याद करता हूँ हरदम अस्ल में है ये नौकरी मेरी जौन को सुनना शे'र कहना है जौन से ही है आशिक़ी मेरी जौन सा तजरबा नहीं है तो उम्र कम होगी वाक़ई मेरी आप के इल्म में इज़ाफ़ा हो जौन पे लिक्खी शा'इरी मेरी शहर में लोग कहते हैं पागल जौन जैसी है ज़िन्दगी मेरी मुस्कुराने लगे हैं ये पत्थर जी अनोखी है बुतगरी मेरी कहती है होंठों से लगाए हो छीनी राधा ने बाँसुरी मेरी बहर में शे'र कहना सिखला दूँ आप देखें ये रहबरी मेरी बस ग़लत को ग़लत कहा था तो हो गई उन से दुश्मनी मेरी — Sachin Sharma
बिछड़ कर फिर वहीं मिलना कभी आसाँ नहीं होता मुहब्बत का नया रस्ता कभी आसाँ नहीं होता तू ग़ालिब मीर मोमिन का पुजारी है मगर सुन ले ग़ज़ल की राह पे चलना कभी आसाँ नहीं होता वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता छलक आती हैं आँखें बचपने को याद कर के अब दुबारा फिर वो दिन मिलना कभी आसाँ नहीं होता दया बिल्कुल नहीं आती थी सर जी कूटते थे जब अरे लिखना सही इमला कभी आसाँ नहीं होता लिखावट एक जैसी है ये दुनिया के हबीबों की तबीबों का लिखा पढ़ना कभी आँसा नहीं होता अभी भी दफ़्न है सीने में वो उजड़ी हुई दुनिया पुरानी बातो पे चर्चा कभी आसाँ नहीं होता ख़ज़ाना चाहते हो और मुश्किल भी नहीं कोई ख़ज़ाना का कोई नक़्शा कभी आसाँ नहीं होता ज़बाँ उर्दू भी है अच्छी मगर नौ सिखिया हम ठहरे ग़ज़ल के पहलू को छूना कभी आसाँ नहीं होता हज़ारों शे'र कहने को तो कह सकते सचिन लेकिन ग़ज़ल के शे'रों में मक़्ता कभी आसाँ नहीं होता — Sachin Sharma