मोहब्बत के दर पर जो आए हुए हैं
सलीक़े से दिल में बिठाए हुए हैं
सनम देवता बन गया इश्क़ का अब
ये सर उस के आगे झुकाए हुए हैं
नसीब आज़माओ मुझे तुम हरा दो
अभी मैं ने पत्ते छुपाए हुए हैं
हैं हाज़िर जवाबी में आगे सभी से
ये बंदे हमारे सिखाए हुए हैं
मोहब्बत हो या ग़म-ज़दा ज़िंदगी पर
नए लड़को पे जौन छाए हुए हैं
मज़ा आता था शे'र पढ़ने में उन को
तभी जौन सिगरेट जलाए हुए हैं
— Sachin Sharma















