थोड़ी नज़र कमज़ोर हैदिल मेरा आदम-ख़ोर हैऐनक लगी दिन भर रहीआँखों पे कितना ज़ोर हैहम शे'र क्या कहने लगेमहफ़िल में देखो शोर हैऊपर से कब वो खींच लेजीवन की छोटी डोर हैइकदम सही अंदाज़ा हैलाला तो बिल्कुल चोर है— Sachin Sharma