कुछ हरकतें करती हैं नादानी से आप
कह देती हैं हर बात आसानी से आप
ये क्या कि सीढ़ी पे अचानक रोकना
बाँहों में क्यूँ भरती हैं शैतानी से आप
पहली दफ़ा चूमा तो अंदाज़ा हुआ
लगते हैं हम को सच में बिरयानी से आप
— Sachin Sharma
कह देती हैं हर बात आसानी से आप
ये क्या कि सीढ़ी पे अचानक रोकना
बाँहों में क्यूँ भरती हैं शैतानी से आप
पहली दफ़ा चूमा तो अंदाज़ा हुआ
लगते हैं हम को सच में बिरयानी से आप
Other ghazal from the same pen
Shers of mahatma gandhi shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling