अलविदा बोला बड़े ही प्यार सेमैं लिपट कर रोया फिर दीवार सेआज मैं इज़हार कर दूँ तो उधरकहने लग जाएगा वो दो चार सेप्रेम ही आधार है जीवन का तोक्या ही हासिल होगा इस तकरार सेअपने पैरों पे खड़ा हो जाऊँ तोतेरे बारे में कहूँ विस्तार सेइतना क्यूँ इतराना अपने आप परइक न इक दिन जाना है संसार से— Sachin Sharma