महकने लगता है लोबान सा दिल
है पाकीज़ा किसी क़ुर'आन सा दिल
तिरे आगे पिघलता, मोम होकर
मगर ये है किसी चट्टान सा दिल
तुम्हारी साँसों की करता हिफ़ाज़त
हमारा बन गया दरबान सा दिल
लगा है रहने जब से पास तेरे
तभी से हो गया शैतान सा दिल
ये करता रहता है बच्चों सी हरकत
अभी तो है बहुत नादान सा दिल
निकल आओ खड़ा है कब से बाहर
मिरी जानाँ तिरा मेहमान सा दिल
पढ़ा है जौन को तो जाना हम ने
ग़ज़ल को चाहिए बेजान सा दिल
— Sachin Sharma















