खू़ँ भरा ख़त है ग़लत है
शा'इरी लत है ग़लत है
छोड़ लड़की हाथ मेरा
ओछी हरकत है ग़लत है
भाग के शादी करे जो
ये मुहब्बत है ग़लत है
दिल से दिल मिलना है बेहतर
तन की चाहत है ग़लत है
अंधो में काना है राजा
बादशाहत है ग़लत है
न्याय के मंदिर रखी है
अंधी मूरत है ग़लत है
जौन ने थूका लहू था
तब ये शोहरत है ग़लत है
— Sachin Sharma















