बेवजह हिंसा करें हम
मुर्दो को ज़िंदा करें हम
क्या बहुत गर्मी चढ़ी है
आ तुझे ठंडा करें हम
आज के दिन उस की शादी
आज क्या शिकवा करें हम
रात भर सिगरेट जलाएँ
और ग़ज़ल लिक्खा करें हम
है शराबी अब सचिन तू
झूठ क्या सच्चा करें हम
— Sachin Sharma
मुर्दो को ज़िंदा करें हम
क्या बहुत गर्मी चढ़ी है
आ तुझे ठंडा करें हम
आज के दिन उस की शादी
आज क्या शिकवा करें हम
रात भर सिगरेट जलाएँ
और ग़ज़ल लिक्खा करें हम
है शराबी अब सचिन तू
झूठ क्या सच्चा करें हम
Other ghazal from the same pen
Shers of dhoop.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling