देखते ही ख़ुमार बढ़ जाएइश्क़ का फिर बुख़ार बढ़ जाएरोज़ गोबर लगा के बैठा करचेहरे का फिर निखार बढ़ जाएतुझ से मिलने चला मैं आऊँगाथोड़ी सी बस पगार बढ़ जाए— Sachin Sharma