मैं तन्हा सर-ए-राह खड़ा सोच रहा हूँतन्हाई मिटाने के लिए जाऊँ कहाँ परवो बे-वफ़ा तो लौट के आने से रहा अबतू ही बता ऐ दिल तुझे बहलाऊँ कहाँ पर— Saif Dehlvi