इक़रार न होना भी अक्सर इनकार से बेहतर होता है

दरवाज़ा भले ही बंद रहे दीवार से बेहतर होता है

जब इश्क़ की सौदेबाज़ी हो ये बात हमेशा याद रहे
गर चुनना पड़े तो बोसा-ए-लब रुख़्सार से बेहतर होता है

जो अपना था वो मिल न सका जो उस का था वो दे आए
बाज़ी में बने रहना भी अक्सर हार से बेहतर होता है

अब और तो क्या इमदाद करें ये दिल रक्खा है ले जाओ
मौक़े पे मिला इक पत्थर भी हथियार से बेहतर होता है

जो ख़ूँ में तेज़ रवानी दे जज़्बों को एक कहानी दे
वो एक मुकम्मल दुश्मन आधे यार से बेहतर होता है

— Surendra Bhatia "Salil"

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